घर के बाहर चारों तरफ भूत की चलने की और भयानक रोने की आवाज
Based on the true story - सच्ची घटना पर आधारित
मेरे मामा की सास गुजर गई थी रात को यह खबर आया. कुछ दिन बाद उनके साथ थी तो हमें सबको जाना था वहां पर. श्राद्ध के दिन मम्मी मैं और मेरी बहन तैयार हो गए जाने के लिए, और सब के साथ मामा के ससुराल चले गए. बहुत ही सुंदर गांव था उनका चारों तरफ हरियाली से भरा. पर हमें क्या पता था उस सुंदर गांव के भयानक रहस्य के बारे में और हमारे साथ जो होने वाला था.
जैसी वहां की सुंदरता थी वैसे ही मुझे कुछ अजीब सा महसूस हुआ. यह जगह मेरे लिए नई थी क्योंकि जब मैं मामा की शादी पर यहां आया था तब मैं बहुत छोटा था और मुझे कुछ भी याद नहीं था. तो वहां पर सब लोग आपस में बातें कर रहे थे, श्राद्ध की रसम हो रही थी, बच्चे खेल रहे थे. घर के 100 मीटर दूरी पर एक बड़ी सा आम के पेड़ था.
तब तक शाम हो गया था और खाने का टाइम भी हो गया था, तो हम खाना खाकर घर जाने की तैयारी कर रहे थे. मामा के ससुराल वाले बोल रहे थे कि शाम हो गए गांव का रास्ता है, अंधेरा भी बहुत है आज यहीं पर रुक जाइए सोने का अच्छा इंतजाम है.
तो बार बार बोलने पर हम लोग आज रात रुकने के लिए तैयार हो गए थे. तो रात को 11:00 बजे हम लोग अपने-अपने बिस्तर पर सो गए. और जिस घर में हम लोग सोने वाले थे वह घर बहुत ही बड़ा था. हमारे साथ और 4 परिवार आराम से सो सकता था उस करते हैं घर पर.
तो कुछ देर हम लोग आपस में बात करते करते एक घंटा बीत चुके थे. फिर हम सब सो गए. आधी रात को 2:30 बजे मेरे मम्मी मुझे जगाती है बोल रही थी...
तभी मुझे उस पर ई आम के पेड़ के नीचे से भयानक रोने की आवाज़ आने लगी. इतनी भयानक थी वो रोने की आवाज सुनते ही मेरे रोंगटे खड़े हो गए. मुझे महसूस हो गया था कि यहां पर क्या चल रहा है.
मम्मी फोन करती है पापा को जल्दी एक गाड़ी भेजें ताकि हम घर जा सके. लेकिन घर से गेट की दूरी बहुत था क्योंकि गांव का घर था बहुत ही बड़ा क्षेत्र था. घर में बाकी लोग कहने लगे की ऐसे नहीं जा पाएंगे हम गाड़ी बुला कर कोई फायदा नहीं है, बहुत खतरा हो सकता है हमारे लिए.
सबके बोलने पर हम लोग उनके बात मान गए. फिर मैं सोच रहा था कि शायद कोई गांव का शरारती लड़के हमारे साथ मजाक कर रहे हमें डराने के लिए. यह सोचकर मेरे अंदर थोड़ा हिम्मत आया. लेकिन आगे जो होने वाला था यह हमें नहीं पता था
भयानक रोने की वह आवाज लगातार 1 घंटे तक बिना रुके चल रहा था. तभी मुझे और बाकी लोगों को पक्का यकीन हो गया था कि यह कोई इंसान नहीं कर सकता यह कोई भूत ही कर सकती है.
डर के मारे सब की हालत खराब किसी की हिम्मत नहीं हो रहा था कि जाकर देखें यह सब कौन कर रहा है.
एक घंटा बीत जाने पर वो रोने की आवाज थम गई मेरे मामा और उनके साला दूसरे घर पर थे. रोना बंद होने के बाद वह दोनों आकर दरवाजा खटखटाने लगे. हमें से किसी की हिम्मत नहीं हो रही थी कि जाकर दरवाजा खोलें.
फिर वह दोनों बोल रहे थे.
मैं समझ गया था कि मामा झूठ बोल रहा है ताकि मुझे और डर ना लगे. तो वह दोनों सब को समझा रहे थे कि डरने की कोई जरूरत नहीं है सब कुछ ठीक हो जाएगा. सब लोग सो जाओ सुबह तक सब ठीक है जगह हम घर चले जाएंगे.
यह बोलने की 2 मिनट बाद ही घर के चारों तरफ ऐसी पैर मारने की आवाज आने लगी जैसे कोई जोर जोर से चल रहा है जमीन पर पैर मारकर. अब तो हालत और खराब हो गई सबकी, इन दोनों की भी. अब तो सब को पक्का यकीन हो गया था कि यह कोई प्रेतात्मा का ही काम है.
आधे घंटे तक बिना रुके वह आत्मा घर के चारों तरफ आवाज करते हुए चल रहा था. आधे घंटे बाद आवाज आनी बंद हो गई, फिर हमें लगा कि सब कुछ खत्म हो गया अब वह चले गए.
लेकिन कुछ ही देर ही बाद फिर से रोती हुई घर के चारों तरफ इतनी आवाज करके चल रही थी कि सब लोग बहुत ही डर गए यहां तक कि मर्द लोग भी.
इस बार वह रोने की ओर चलने की आवाज ज्यादा देर तक नहीं चली, 10 मिनट बाद ही फिर से सब कुछ रुक गई.
फिर घर के सारे मर्दों ने फैसला किया कि सब लोग मिलकर बाहर जाकर देखेंगे कि क्या हो रहा है. चलने की आवाज तो रुक गई थी, तो सब लोग मिलकर डंडा लेकर बाहर जाकर ढूंढने लगे लेकिन किसी को कुछ नहीं मिला.
फिर हम लोग ज्यादा देर नहीं लगाई, तुरंत ही गाड़ी बुला कर हम सब उसी रात कर चले गए थे. इस दिन के बाद में उस गांव पर आज तक नहीं गया.
Based on the true story - सच्ची घटना पर आधारित
मेरे मामा की सास गुजर गई थी रात को यह खबर आया. कुछ दिन बाद उनके साथ थी तो हमें सबको जाना था वहां पर. श्राद्ध के दिन मम्मी मैं और मेरी बहन तैयार हो गए जाने के लिए, और सब के साथ मामा के ससुराल चले गए. बहुत ही सुंदर गांव था उनका चारों तरफ हरियाली से भरा. पर हमें क्या पता था उस सुंदर गांव के भयानक रहस्य के बारे में और हमारे साथ जो होने वाला था.
जैसी वहां की सुंदरता थी वैसे ही मुझे कुछ अजीब सा महसूस हुआ. यह जगह मेरे लिए नई थी क्योंकि जब मैं मामा की शादी पर यहां आया था तब मैं बहुत छोटा था और मुझे कुछ भी याद नहीं था. तो वहां पर सब लोग आपस में बातें कर रहे थे, श्राद्ध की रसम हो रही थी, बच्चे खेल रहे थे. घर के 100 मीटर दूरी पर एक बड़ी सा आम के पेड़ था.
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तब तक शाम हो गया था और खाने का टाइम भी हो गया था, तो हम खाना खाकर घर जाने की तैयारी कर रहे थे. मामा के ससुराल वाले बोल रहे थे कि शाम हो गए गांव का रास्ता है, अंधेरा भी बहुत है आज यहीं पर रुक जाइए सोने का अच्छा इंतजाम है.
तो बार बार बोलने पर हम लोग आज रात रुकने के लिए तैयार हो गए थे. तो रात को 11:00 बजे हम लोग अपने-अपने बिस्तर पर सो गए. और जिस घर में हम लोग सोने वाले थे वह घर बहुत ही बड़ा था. हमारे साथ और 4 परिवार आराम से सो सकता था उस करते हैं घर पर.
तो कुछ देर हम लोग आपस में बात करते करते एक घंटा बीत चुके थे. फिर हम सब सो गए. आधी रात को 2:30 बजे मेरे मम्मी मुझे जगाती है बोल रही थी...
"बेटा उठ जाओ हम लोग अपने घर जा रहे हैं."
"क्यों क्या हो गया रात को बज रहे हैं अब मैं भी घर क्यों जा रहे हैं"
तभी मुझे उस पर ई आम के पेड़ के नीचे से भयानक रोने की आवाज़ आने लगी. इतनी भयानक थी वो रोने की आवाज सुनते ही मेरे रोंगटे खड़े हो गए. मुझे महसूस हो गया था कि यहां पर क्या चल रहा है.
मम्मी फोन करती है पापा को जल्दी एक गाड़ी भेजें ताकि हम घर जा सके. लेकिन घर से गेट की दूरी बहुत था क्योंकि गांव का घर था बहुत ही बड़ा क्षेत्र था. घर में बाकी लोग कहने लगे की ऐसे नहीं जा पाएंगे हम गाड़ी बुला कर कोई फायदा नहीं है, बहुत खतरा हो सकता है हमारे लिए.
सबके बोलने पर हम लोग उनके बात मान गए. फिर मैं सोच रहा था कि शायद कोई गांव का शरारती लड़के हमारे साथ मजाक कर रहे हमें डराने के लिए. यह सोचकर मेरे अंदर थोड़ा हिम्मत आया. लेकिन आगे जो होने वाला था यह हमें नहीं पता था
भयानक रोने की वह आवाज लगातार 1 घंटे तक बिना रुके चल रहा था. तभी मुझे और बाकी लोगों को पक्का यकीन हो गया था कि यह कोई इंसान नहीं कर सकता यह कोई भूत ही कर सकती है.
डर के मारे सब की हालत खराब किसी की हिम्मत नहीं हो रहा था कि जाकर देखें यह सब कौन कर रहा है.
एक घंटा बीत जाने पर वो रोने की आवाज थम गई मेरे मामा और उनके साला दूसरे घर पर थे. रोना बंद होने के बाद वह दोनों आकर दरवाजा खटखटाने लगे. हमें से किसी की हिम्मत नहीं हो रही थी कि जाकर दरवाजा खोलें.
फिर वह दोनों बोल रहे थे.
" हम लोग ही है दरवाजा खोल दो. अगर किसी को डर लग रहा है तो सारे साथ में आकर दरवाजा खोल दो."फिर हम हिम्मत जुटाकर दो-तीन लोग जाकर दरवाजा खोल दिए. तो वह लोग अंदर आ गए. मैंने मामा से पूछा कि मामा कौन रो रहा है उस आमके पैर के नीचे? उसके पास बोलने के लिए कोई शब्द नहीं था. फिर उसने मुझे बोल दिया कि अरे किसी की बकरी रो रही है. बकरी भी ऐसे ही रोते ही इंसान की तरह.
मैं समझ गया था कि मामा झूठ बोल रहा है ताकि मुझे और डर ना लगे. तो वह दोनों सब को समझा रहे थे कि डरने की कोई जरूरत नहीं है सब कुछ ठीक हो जाएगा. सब लोग सो जाओ सुबह तक सब ठीक है जगह हम घर चले जाएंगे.
यह बोलने की 2 मिनट बाद ही घर के चारों तरफ ऐसी पैर मारने की आवाज आने लगी जैसे कोई जोर जोर से चल रहा है जमीन पर पैर मारकर. अब तो हालत और खराब हो गई सबकी, इन दोनों की भी. अब तो सब को पक्का यकीन हो गया था कि यह कोई प्रेतात्मा का ही काम है.
आधे घंटे तक बिना रुके वह आत्मा घर के चारों तरफ आवाज करते हुए चल रहा था. आधे घंटे बाद आवाज आनी बंद हो गई, फिर हमें लगा कि सब कुछ खत्म हो गया अब वह चले गए.
लेकिन कुछ ही देर ही बाद फिर से रोती हुई घर के चारों तरफ इतनी आवाज करके चल रही थी कि सब लोग बहुत ही डर गए यहां तक कि मर्द लोग भी.
इस बार वह रोने की ओर चलने की आवाज ज्यादा देर तक नहीं चली, 10 मिनट बाद ही फिर से सब कुछ रुक गई.
फिर घर के सारे मर्दों ने फैसला किया कि सब लोग मिलकर बाहर जाकर देखेंगे कि क्या हो रहा है. चलने की आवाज तो रुक गई थी, तो सब लोग मिलकर डंडा लेकर बाहर जाकर ढूंढने लगे लेकिन किसी को कुछ नहीं मिला.
फिर हम लोग ज्यादा देर नहीं लगाई, तुरंत ही गाड़ी बुला कर हम सब उसी रात कर चले गए थे. इस दिन के बाद में उस गांव पर आज तक नहीं गया.

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