एक छोटे से शहर में प्रीतम नाम का एक लड़का था. लेकिन रोहित की किस्मत खराब है उसके एक पैर खराब था. एक दिन उसके साथ के सारे बच्चे फुटबॉल खेल रहे थे, तो प्रीतम ग्राउंड के साइट पर बैठकर सोच रहा था कि...
काश मैं भी इन बच्चों के जैसा फुटबॉल खेल सकता, दोनों पैर पर चल सकता. प्रीतम बैठकर यह सोच रहा था कै मैं हर रोज तो यहां बैठा रहता हूं क्यों ना आज जंगल में जाकर घूम कर आया जाए. यह बोलता हुआ प्रीतम निकल पड़े जंगल की तरफ.
जंगल में घुस के थोड़ी दूर ही चलने के बाद प्रीतम को झाड़ियों में से कुछ आवाजें आने लगी. पास जाकर देखा तो उसने देखा एक बहुत ही सुंदर पंछी झाड़ियों की ट्रेनों में फंसे हुए हैं.
यह देखकर प्रीतम ने बोला अरे यह पंछी तो झाड़ियों में फंसा हुआ है, और इसमें से तो खून भी बह रहा है. फिर प्रीतम को दया आया और उसने उस फंसे हुए पंछी को आजाद कर दिया. पंछी को बाहर निकलते वक्त प्रीतम के हाथों में खरोंच भी आ गए थे.
फिर उसने अपने लंच बॉक्स में से थोड़ा सा खाना और बोतल के ढक्कन में थोड़ा पानी निकाल कर उसको पिलाया. फिर प्रीतम को चिंता होने लगी उस छोटे बच्चे पंछी के लिए, की उसे अब कहां छोरे. फिर वहां पर एक बड़ी पंछी आई जो उस छोटी पंछी की मां थी. वह आकर छोटी पंछी से बातें करने लगी.
More jadui kahani
बैसाखी उठाकर प्रीतम स्कूल की तरफ जाने ही वाला था तभी पीछे से एक आवाज आती है. "रोको बच्चे"!
प्रीतम ने आसपास देखा और उसे कुछ नहीं दिखा फिर प्रीतम ने बोला शायद यह मेरा भ्रम था. फिर वह जाने के लिए मुरा तो फिर से वही मेरी आवाज सुनाई दी.
प्रीतम: कौन हो तुम दिखते क्यों नहीं?
पंछी: मैं वहीं हूं जिसके बच्चे की जान तुमने बचाई
प्रीतम: अरे तुम क्या बोल सकते हो?
पंछी: हां मैं बोल सकती हूं, तुमने मेरे बच्चे की मदद की मैं भी तुम्हारी कुछ मदद करना चाहती हूं
प्रीतम: मेरी मदद! अरे उसके कोई जरूरत नहीं यह तो मेरा फर्ज था मुझे बदले में कुछ नहीं चाहिए
पंछी: मुझे पता है लेकिन फिर भी तुम मेरा यह पंख ले जाओ
प्रीतम: लेकिन मैं इस पंख का क्या करूंगा
पंछी: यह एक जादुई पंख है, इससे तुम जो मांगोगे वह तुम्हें मिल जाएगा. लेकिन सिर्फ दो बार यह तुम्हारे दो इच्छाएं पूरी कर सकता है
प्रीतम: आपका बहुत-बहुत धन्यवाद!
जब सुंदर सोने के लिए बिस्तर पर गया तब उसे उस पंख का ख्याल आया.
"पता नहीं उस पंछी का जादुई पंख काम करेगा कि नहीं, क्यों ना आजमा कर देखो, कैसे पता चलेगा एक काम करता है या नहीं". तभी उसके नजर अपने हाथ पर लगी हुई खरोच पर गई. यह चोट तो उस पंछी को कांटों में से निकलते वक्त लगी, इसी पर कोशिश करके देखता हूं.
यह बोलकर ही प्रीतम उस पंख को अपनी चोट के ऊपर लहराया और बोला यह चोट ठीक हो जाए. अरे यह क्या चोट तो ठीक हो गए. नामोनिशान भी नहीं बचा.
फिर उसने अपनी पैर पर वह पंख लहराया और बोला मेरे पैर ठीक हो जाए और मैं सब बच्चों की तरह दौड़ने लगूं. यह बोलते ही उसके पैरों में झनझनाहट हुई उसने बिस्तर से उठकर धीरे धीरे चलने की कोशिश की. तभी सुंदर चलने की कोशिश करते हैं और वह चल पड़ा.
प्रीतम: अरे वाह मैं तो बिना बैसाखी की चल सकता हूं, मेरे पैर तो बिल्कुल ठीक हो गया. मैं दौड़ सकता हूं, मैं नाच सकता हूं.
शोर सुनकर उसके मम्मी पापा भी कमरे में आए और अपने बेटे से इस तरह से दौड़ते हुए देखकर उनके आंखों से खुशी के आंसू बहने लगे.
प्रीतम की मम्मी पापा उससे पूछते हैं अरे वाह यह चमत्कार कैसे हुआ? प्रीतम उनको स्कूल की जंगल वाली पूरी कहानी बताता है और यह भी बताता है कि इस जादुई पंख से सिर्फ दो ही इच्छा मांग सकता था अब यह मेरी कोई भी इच्छा पूरी नहीं करेगी.
प्रीतम की मम्मी ने बोला बेटा तुम्हारा पैर तो ठीक हो गया अब तुम्हें और क्या चाहिए? प्रीतम ने बोला हां अब मुझे और कुछ भी चाहिए मैं बहुत खुश हूं.
काश मैं भी इन बच्चों के जैसा फुटबॉल खेल सकता, दोनों पैर पर चल सकता. प्रीतम बैठकर यह सोच रहा था कै मैं हर रोज तो यहां बैठा रहता हूं क्यों ना आज जंगल में जाकर घूम कर आया जाए. यह बोलता हुआ प्रीतम निकल पड़े जंगल की तरफ.
जंगल में घुस के थोड़ी दूर ही चलने के बाद प्रीतम को झाड़ियों में से कुछ आवाजें आने लगी. पास जाकर देखा तो उसने देखा एक बहुत ही सुंदर पंछी झाड़ियों की ट्रेनों में फंसे हुए हैं.
यह देखकर प्रीतम ने बोला अरे यह पंछी तो झाड़ियों में फंसा हुआ है, और इसमें से तो खून भी बह रहा है. फिर प्रीतम को दया आया और उसने उस फंसे हुए पंछी को आजाद कर दिया. पंछी को बाहर निकलते वक्त प्रीतम के हाथों में खरोंच भी आ गए थे.
फिर उसने अपने लंच बॉक्स में से थोड़ा सा खाना और बोतल के ढक्कन में थोड़ा पानी निकाल कर उसको पिलाया. फिर प्रीतम को चिंता होने लगी उस छोटे बच्चे पंछी के लिए, की उसे अब कहां छोरे. फिर वहां पर एक बड़ी पंछी आई जो उस छोटी पंछी की मां थी. वह आकर छोटी पंछी से बातें करने लगी.
More jadui kahani
बैसाखी उठाकर प्रीतम स्कूल की तरफ जाने ही वाला था तभी पीछे से एक आवाज आती है. "रोको बच्चे"!
प्रीतम ने आसपास देखा और उसे कुछ नहीं दिखा फिर प्रीतम ने बोला शायद यह मेरा भ्रम था. फिर वह जाने के लिए मुरा तो फिर से वही मेरी आवाज सुनाई दी.
प्रीतम: कौन हो तुम दिखते क्यों नहीं?
पंछी: मैं वहीं हूं जिसके बच्चे की जान तुमने बचाई
प्रीतम: अरे तुम क्या बोल सकते हो?
पंछी: हां मैं बोल सकती हूं, तुमने मेरे बच्चे की मदद की मैं भी तुम्हारी कुछ मदद करना चाहती हूं
प्रीतम: मेरी मदद! अरे उसके कोई जरूरत नहीं यह तो मेरा फर्ज था मुझे बदले में कुछ नहीं चाहिए
पंछी: मुझे पता है लेकिन फिर भी तुम मेरा यह पंख ले जाओ
प्रीतम: लेकिन मैं इस पंख का क्या करूंगा
पंछी: यह एक जादुई पंख है, इससे तुम जो मांगोगे वह तुम्हें मिल जाएगा. लेकिन सिर्फ दो बार यह तुम्हारे दो इच्छाएं पूरी कर सकता है
प्रीतम: आपका बहुत-बहुत धन्यवाद!
जब सुंदर सोने के लिए बिस्तर पर गया तब उसे उस पंख का ख्याल आया.
"पता नहीं उस पंछी का जादुई पंख काम करेगा कि नहीं, क्यों ना आजमा कर देखो, कैसे पता चलेगा एक काम करता है या नहीं". तभी उसके नजर अपने हाथ पर लगी हुई खरोच पर गई. यह चोट तो उस पंछी को कांटों में से निकलते वक्त लगी, इसी पर कोशिश करके देखता हूं.
यह बोलकर ही प्रीतम उस पंख को अपनी चोट के ऊपर लहराया और बोला यह चोट ठीक हो जाए. अरे यह क्या चोट तो ठीक हो गए. नामोनिशान भी नहीं बचा.
फिर उसने अपनी पैर पर वह पंख लहराया और बोला मेरे पैर ठीक हो जाए और मैं सब बच्चों की तरह दौड़ने लगूं. यह बोलते ही उसके पैरों में झनझनाहट हुई उसने बिस्तर से उठकर धीरे धीरे चलने की कोशिश की. तभी सुंदर चलने की कोशिश करते हैं और वह चल पड़ा.
प्रीतम: अरे वाह मैं तो बिना बैसाखी की चल सकता हूं, मेरे पैर तो बिल्कुल ठीक हो गया. मैं दौड़ सकता हूं, मैं नाच सकता हूं.
शोर सुनकर उसके मम्मी पापा भी कमरे में आए और अपने बेटे से इस तरह से दौड़ते हुए देखकर उनके आंखों से खुशी के आंसू बहने लगे.
प्रीतम की मम्मी पापा उससे पूछते हैं अरे वाह यह चमत्कार कैसे हुआ? प्रीतम उनको स्कूल की जंगल वाली पूरी कहानी बताता है और यह भी बताता है कि इस जादुई पंख से सिर्फ दो ही इच्छा मांग सकता था अब यह मेरी कोई भी इच्छा पूरी नहीं करेगी.
प्रीतम की मम्मी ने बोला बेटा तुम्हारा पैर तो ठीक हो गया अब तुम्हें और क्या चाहिए? प्रीतम ने बोला हां अब मुझे और कुछ भी चाहिए मैं बहुत खुश हूं.

No comments:
Post a Comment