हमारे गांव में एक बहुत बड़ा, बहुत ही पुरानी जंगल थी. उस जंगल के अंदर एक घर था जो बहुत ही भूतिया बताया जाता था. और गांव में कुछ बहुत ही शरारती लड़के थे जिन्हें भूत से कोई डर नहीं लगता था. नहीं विश्वास था उन्हें भूत प्रेत में.
वहां तीन लड़के थे और उनके नाम थे दिनेश, बादल और कमल. उस भूतिया घर(bhoot ka ghar) के आस-पास भी कोई डर के मारे नहीं जाता था क्योंकि बहुत ही डरावनी आवाजें आती थी उस घर के अंदर से. हंसने की आवाज, चीजें टूटने की आवाज, रोने की आवाज पता नहीं कैसे-कैसे आवाज आती थी. पर उन तीन लड़के की भूत में विश्वास ना होने की वजह से तीनों ने एक दिन फैसला किया एक दिन यह सारे मिलकर उस घर में जाकर देखेंगे कि आखिर उस घर में है क्या. वह लड़के साबित करना चाहते थे कि भूत जैसा कुछ नहीं होता.
एक दिन तीनों लड़के इस विषय में चर्चा कर रहे थे कि किस समय उस घर पर जाकर देखा जाए कि वहां क्या है. किस चीज से लोग इतना डरते हैं वहां जाने पर. तो दिनेश बोला हम लोग दोपहर में जाएंगे तो हमें कोई खतरा नहीं होगा अगर कोई भूत होगा भी तो. तभी कमल ने बोला दोपहर पर तो हमारी स्कूल है, हम दोपहर में कैसे जाएंगे. बादल बोला सही बोला कमल हम दोपहर में नहीं जा सकते हम शाम को चलते हैं, वैसे भी भूत जैसा तो कुछ होता ही नहीं है हमें डरने की कोई जरूरत नहीं. फिर तीनों ने एक दूसरे के बात मान के राजी हो गए शाम को जाने के लिए. फिर स्कूल छुट्टी होने पर ही तीनों तैयार हो गए उस भूतिया घर पर जाने के लिए, अंधेरा कुछ ज्यादा नहीं था फिर भी तीनों ने एक टॉर्च ले लिया ठीक से देखने के लिए. तीनों लड़के निकल पड़े घर के तरफ, करीब 10 मिनट चलने के बाद वह तीनों पहुंच गए घर(bhoot ka ghar) के पास.
लेकिन उन तीनों को कोई भी आवाज या फिर कोई भी भूतिया कांड होता हुआ नहीं दिख रहा था. तो दिनेश ने बोला देखा हमने बोला था ना भूत जैसा कुछ नहीं होता सारे गांव वाले के भ्रम है, चल अंदर चल कर देखते आखिर इस घर में ऐसा है क्या. तो तीनों घर के अंदर गए और चीजें देखने लगे. कुछ पुरानी कांच के बर्तन कुछ स्टील के बर्तन और कुछ घर के सामान थे.
तब तक बाहर अंधेरा हो गया था. तीनों लड़के घर में छानबीन करने के बाद इन्हें कोई भूत नहीं मिला फिर बाहर निकल गए और बहुत खुश थे. खुश इसलिए क्योंकि इन लड़कों को यहां पर कोई खतरा या भूत नहीं दिखा. लेकिन इन सब को क्या पता था कि आगे इनके साथ क्या होने वाला है. भूतिया घर से बाहर निकलने के बाद कमल बोला चलो अब हम अपने अपने घर के तरफ चलते हैं. फिर तीनों अपने घर के तरफ निकल पड़े.
कुछ ही दूर चलने के बाद रास्ते में इनको सामने से कुछ आवाजें आने लगी ऐसा लग रहा था कि कोई कुछ चीज चबा चबा कर खा रही है. फिर कमल ने दिनेश को बोला टॉर्च करना आगे देखते हैं कैसी आवाज आ रही है. फिर जैसी दिनेश ने टॉर्च को आगे की तरफ गया इन तीनों को दिखा की एक बूढ़ी औरत कुछ खा रही है. टॉर्च लाइट पढ़ते ही वह बूढ़ी औरत इनकी तरफ जैसे ही मुड़ के देखी. चेहरे पर खून से लथपथ वह बूढ़ी औरत कच्ची मछलियां चबा चबा कर खा रही थी.
फिर वह भूतनी बुढ़िया इन तीनों लड़के की तरफ देखकर ऐसे जोर जोर से हंसने लगी तीनों के रोंगटे खड़े हो गए. तीनों लड़के डर के मारे इधर-उधर भागने लगे, छूटने लगे, चिल्लाने लगे बचाओ बचाओ यह बुढ़िया हमें कच्ची खा जाएगी.
तभी दिनेश ने बोला कोई भी अलग मत हो सारे एक साथ भागते हैं तो हमें कुछ नहीं होगा तुम लोग बस पीछे की तरफ मत देखो और सीधा भागते रहो. तीनों लड़की पूरी दम लगा कर भागते रहे और वह बुढ़िया पीछे पीछे बहुत ही जोर से भागती रही पकड़ने के लिए. बादल भागते हुए चिल्ला रहा था यह भूतनी हमें खा जाएगी हम कोई भी नहीं बचेंगे.
दिनेश ने हौसला उठाते हुए बोला तू बस पीछे मत देख, हमें कुछ नहीं होगा हम जंगल से निकल जाएंगे. तभी कमल ने पीछे मुड़कर देखा तो वह भूतनी पीछे छूट गई. फिर किसी तरह तीनों लड़के जंगल से बाहर निकल ही गए. फिर जाकर तीनों की जान में जान आई. फिर तीनों मिलकर वादा किए कि कभी इस जंगल पर कोई अकेला नहीं जाएगा. कोई जाएगा भी तो किसी बड़े लोग के साथ जाएंगे.



बहुत अच्छी स्टोरी है
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